टहलते हुए आइए, सोचते हुए जाइए.

Monday, May 18, 2009

दूसरों को दोष देने से पहले

एक बार एक आदमी एक डाक्टर के पास गया और बोला की उसकी बीबी ऊंचा सुनाती है। इससे उसे बहुत परेशानी होती है। डाक्टर ने उसे सलाह दी की वह उसके बहरेपन के लेवल का पहले पता करे। फ़िर वह उसके पास आए। आदमी ने पूछा की यह लेवल वह कैसे पता कर सकता है? डाक्टर ने उसे बहुत आसान सा तरीका सुझाया। उसने कहा की वह पहले ४० फीट की दूरी से एक बात कहे, यदि उसे इसका जवाब नहीं मिलता है तो वह उस दूरी को ३० फीट में बदल दे और फ़िर पूछे। फ़िर भी जवाब नहीं मिलता है तो उसे २० फीट करदे। ऐसा वह तबतक करता रहे, जबतक की उसे पत्नी से जवाब नहीं मिल जाता। आदमी ने ऐसा ही कराने का वचन दिया।
दूसरे दिन आदमी ४० फीट की दूरी पर खड़ा हो गया और उसने अपनी पत्नी से पूछा- "आज नाश्ता क्या बना है?"। उसे कोई जवाब नहीं मिला। फ़िर वह ३० फीट की दूरी पर गया और फ़िर से वही सवाल पूछा की आज नाश्ता क्या बना है?" उसे फ़िर जवाब नहीं मिला। अब वह २५ फीट की दूरी पर गया और फ़िर से सवाल दुहराया। जवाब न मिलाने पर २० फीट की दूरी पर जा कर उसने वही सवाल फ़िर से पूछा। क्रमश: वह दूरी घटाता गया और पत्नी से वही सवाल दुहराता गया।जवाब न मिलाने के कारण वह काफी खीझ रहा था। उसका गुस्सा और चिढ दोनों बढ़ते जा रहे थे।
अंत में जब वह ५ फीट की दूरी पर रह गया तब उसने फ़िर से अपनी पत्नी से पूछा, "क्या अब तुम बताओगी की आज नाश्ता क्या बना है?" पत्नी ने भी उसी चिढ और खीझ के साथ जवाब दिया- "तब से लेकर अबतक सात बार बता चुकी हूँ की आज नाश्ते में सैड्विच बना है। और कितनी बार बताऊँ?"

2 comments:

chandrashekhar HADA said...

wah...WAH !

आरडीएक्स said...

wah...WAH ! नहीं, 'हा हा हा हा' कहें.......