टहलते हुए आइए, सोचते हुए जाइए.

Monday, May 5, 2008

गाली भी कितनी सुहावन

शादी का समय है। बड़ी इच्छा हो रही है शादी का भोज खाने की। पहले जैसा, पत्तल लगा कर, घर और मोहल्ले की दादी, चाची और महाराज जी के हाथों का बनया। प्रेम से, गलिया कर खिलाती भौजैयान्न। आज के केतारार वाला खाना नहीं।
शादी ब्याह हो और हँसी मजाक, गाली के फव्वारे ना छूटें, ऐसा कैसे हो सकता है? शादी ब्याह मी तो हर मौके पर एक गाली। रस्म की समाप्ति ही ना हो, अगर गाली ना हो। तिलक चढ़ रहा है लडके का और गालिया गई। लड़की का कन्या निरीक्षण हो रहा है और जेठ को गालियों से नवाजा जा रहा है- ऐसन सुंदर गौर के छ्छुन्नर मिलालाई भैन्सुरा। साड़ी देलियाई चधबे लागी, पेंह लेल्कैं भैन्सुरा, अरे छम छम नाचे भैन्सुरा।' मंडप पर प्म्दित और नाइ दोनों है और दोनों को गालियों के उपहार दिए जा रहे हैं- अकलेल बभना, बकलेल बभना, एक रत्ती नून ला करे छाई खेखाना' लावा छिदियाया जा रहा है, दूल्हे की सारी रिश्तेदारून से अपने घरों के पुरुषों के सम्बन्ध जोड़े जा रहे हैं- बाऊ लाबा छिदियाऊ, बाऊ बीछी बीछी खाऊ, अहांक अम्मा, हमर बाबू जवारे सुताऊ। (माफी सहित यदि किसी को बुरा लगे)। दूसरे दिन के मराजादी भोज, (अब तो एक दिन की शादी में यह रस्म खत्म ही हो गई है) में सभी प्रमुख पाहुनों के नाम नोट करके घर की औरतों को दे दिए जाते हैं। फ़िर क्या है, दे गालियाँ- 'चटनी पूरी, चटनी पूरी, चटनी है अमचूर की, खानेवाला समधी साला, सूरत है लंगूर की, दायें हाथ से भात खाए, बांये हाथ से दाल रे, मुंह उठा कर दही चाते, कुकुर जैसन चाल रे।' ओह, ऐसा माहौल होता था कि अगर किसी पुरूष प्रधान के नाम से गाली नहीं गई गई तो वह नाराज़ हो जाता था। उसे लगता था कि बरात में वह महत्वपूर्ण नही है।
आज तो शादी-ब्याक के ही ठेठ गीत लुप्त से हो रहे हैं। लेडीज़ संगीत का ज़मानाहै। मुझे तो आज भी वे सभी गीत याद हैं, जो बेटी या बेटों की श्हदी में गाए जाते हैं। आहाहा, क्या रस, क्या मिठास, क्या सुर, क्या साज। और इन सबके बीच, इन गालियों का अपना अलग ही स्वाद। इनके बिना तू शादी- बया वैसा ही फीका रहता है, जैसे बिना नमक के तरकारी, बिना शक्कर के मिठाई।

2 comments:

Udan Tashtari said...

हमारे यहाँ गोरखपुर में भी खूब गाली गाई जाती है शादी में. :)

हर्षवर्धन said...

गारी के बिना तो कलेवा, खिचड़ी या यूं कहें कि पूरी शादी का ही मजा नहीं आता था। अब तो, गारी से गोली चल जाए।